संविधान जब तक लागू है उसका सम्मान है पर यह मानना पड़ेगा यह दो कौड़ी का संविधान है इसे जिन परिस्थितियों में बनाया गया जो भी इसको बनाने वाले है उनकी योग्यता अयोग्यता का सवाल नही पर यह संविधान नाकारा है जिसमे चेक और बैलेंस इतना ज्यादा है की संवैधानिक संकट की हर जगह गुंजाइस है एक देश जो भौगोलिक रूप से ,ऐतिहासिक रूप से धार्मिक रूप से एक है उसे संघीय ढांचे का रूप देने की क्या आवश्यकता थी अगर प्रसासनिक दृष्टि से इतने बड़े देश को शाशन की सुगमता के लिए छोटे स्टेट बनाना था तो उसको भाषा के आधार पर क्यों किया गया नक़्शे को जामेट्री के हिसाब से क्यों नही बांट दिया गया फिर ला एंड आर्डर स्टेट को क्यों दिया गया इससे क्या स्टेट के विद्रोह का खतरा नही है
किसी एक को तो सुप्रीम ऑथोरिटी देनी ही चाहिए अगर केंद्र को कोई पावर ही नही तो केंद्र में सरकार ही क्यों है
कोलकाता में जिस तरह cbi के अफसरों को गिरफ्तार किया गया उससे सिद्ध होता है की अब इस संविधान को कूड़े मे फेक दिया जाना चाहिए और एक नया संविधान बनाया जाना चाहिए जिसमे सब बात सीधे सीधे डिफाइंड होना चाहिए ये संविधान मीठी बातें तो करता है पर जलेबी की तरह टेढ़ी मेढ़ी।
किसी एक को तो सुप्रीम ऑथोरिटी देनी ही चाहिए अगर केंद्र को कोई पावर ही नही तो केंद्र में सरकार ही क्यों है
कोलकाता में जिस तरह cbi के अफसरों को गिरफ्तार किया गया उससे सिद्ध होता है की अब इस संविधान को कूड़े मे फेक दिया जाना चाहिए और एक नया संविधान बनाया जाना चाहिए जिसमे सब बात सीधे सीधे डिफाइंड होना चाहिए ये संविधान मीठी बातें तो करता है पर जलेबी की तरह टेढ़ी मेढ़ी।
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